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| Delhi Mein Chicken Tandoori Illegal? बांध पर उठा बड़ा सवाल क्या है सच |
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर और लोकल मार्केट मे एक खबर बहुतही तेजी से आग की तरह फल रही है,सुनने में आ रही है Delhi में Tandoori इललीगल कर दिया गया है यहाँ फिर इस पर बैन लगा दी गई है। इस खबर ने आम लोगों से लेकर ढाबा,होटल,रेस्टोरोनेट मल्लिक तक को गहरी चिन्ता में डाल दिया, लेकिन अब सवाल यह आकर खड़ी होती है की क्या सच मे दिल्ली मे Chicken Tandoori पर बेन लगाया गया है, अगर लगाया गया है तो किस लिए यह बेन लगाई गया है क्या है, इसके पीछे का कारन तो चलिए यह जान लेते हैं विस्तार से।
Delhi मे Chicken Tandoori पर बैन
दिल्ली में अभी के समय में तंदूरी चिकन पर पुण्य रूप से बैन नहीं लगाया गया है लेकिन इस पर कार्रवाई जरूर हुआ है,जो लोग कोल् यह फिर firewood based traditional tandoors बनाते है (उसमें जो खुले में धुआँ निकलते हैं)उस पर सख़्त नियम लागू किए गए हैं। लेकिन जब यह बात पता चली दिल्ली के जनता तब किसी को भी एकिन नहीं हुए वहला तंदूरी पे क्यों बैन लगाने लगी दिल्ली की सरकार इस बात को लेकर पब्लिक थोड़े कंफ्यूज और गुस्से में भी दिखे तो क्या असली कारन।
Tandoor बेन का असली कारन
दिल्ली के सरकार ने चिकेन तंदूरी को बेन कर दिया और जितने भी चिकेन खाने वाले वो लोग परेशान लेकिन क्यों असल मे यह बात आप लोगों को भी जान कर हैरानी होगी की चिकन तंदूरी एयर पॉल्यूशन में अच्छी खासी कंट्रीब्यूट करती है, लेकिन कैसे चलिए जान लेते हैं.
जब चिकन तंदूरी को पकाया जाता है तब उस ओवन का 480°c लेकर 900°c तक पहुंच जाता है और इसे बहुत अच्छा खासा हित जनरेट करता है और इसे लिए Pollution मे अच्छा खासा कंट्रीब्यूट करता है tandoori खाना। दिल्ली को अगर उपर से देखा जाए तो एक जगह तो तंदूरी नहीं बनती हजारों ऐसी जगह है जहां टंडौरी बनती है और इसीलिए पॉल्यूशन में बहुत ही अच्छी खासी कंट्रीब्यूट करती है चिकन तंदूरी।
कई साइंटिफिक रिसर्च के अनुसार जो लोग तंदूर के सामने खड़े होकर तंदूरी बनती है उसके लांस का वही हालत है जो दिन में 10 सिगरेट पीने वाले का जो हालात है लेकिन इसका मतलब बेन लगाया गया है Delhi के पोल्लुशन कण्ट्रोल कमिटी (DPCC) अनुसार हाल ही में निर्देश जारी किए हैं जिनमें coal और firewood से चलने वाले tandoors का इस्तेमाल पूरी तरह बैन किया गया है।
आदेश का उद्देश्य हवा की गुणवत्ता (AQI) को सुधारना है, क्योंकि यह पारंपरिक तंदूर आधे-खुले स्थानों पर ज़्यादा धुआँ छोड़ते हैं और वायु प्रदूषण को बढ़ाते हैं। यह कदम Stage IV GRAP (pollution control measures) का हिस्सा है, जब Delhi की वायु गुणवत्ता hazardous स्तर पर पहुँच जाती है।
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