Breaking news:पश्चिम बंगाल में SIR विरोध प्रदर्शन के दौरान न्यायाधीशों के साथ दुर्व्यवहार पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, CBI या NIA जांच पर विचार

Breaking news:पश्चिम बंगाल में SIR विरोध प्रदर्शन के दौरान न्यायाधीशों के साथ दुर्व्यवहार पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, CBI या NIA जांच पर विचार
Breaking news:पश्चिम बंगाल में SIR विरोध प्रदर्शन के दौरान न्यायाधीशों के साथ दुर्व्यवहार पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, CBI या NIA जांच पर विचार



Breaking news : पश्चिम बंगाल में SIR विरोध प्रदर्शन के दौरान न्यायाधीशों के साथ दुर्व्यवहार पर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, CBI या NIA जांच पर विचार


 पश्चिम बंगाल में SIR विरोध प्रदर्शन के नाम पर कालियाचक में न्यायाधीशों को कई घंटों तक घेरकर रखने की घटना को लेकर उस के उपर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने राज्य के गृह सचिव और डीजीपी से इस घटना पर रिपोर्ट तलब की है। साथ ही, इस मामले की CBI या NIA से जांच कराने की बात भी कही है।


इस बीच, कोलकाता हाईकोर्ट की ओर से इस घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट को पत्र भेजा गया था। यहां तक कि व्हाट्सऐप के जरिए भी न्यायाधीशों के बीच इस मामले पर बातचीत हुई थी, यह जानकारी आज सुप्रीम कोर्ट में दी गई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने अपने पत्र में बताया कि जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक दोनों ही घटनास्थल पर नहीं पहुंचे थे। स्थिति को संभालने के लिए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को खुद राज्य के डीजी और गृह सचिव


 को फोन करना पड़ा। अन्य वरिष्ठ न्यायाधीश भी लगातार संपर्क में थे। रात 12 बजे के बाद जब न्यायाधीशों को मुक्त किया गया, तब उनकी गाड़ियों पर लाठियों से हमला किया गया और पत्थर फेंके गए। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस घटना का न्यायिक अधिकारियों पर गंभीर भय का प्रभाव पड़ेगा और यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी निभाने में विफलता का उदाहरण है।


इस मामले पर नाराज़गी जताते हुए न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने कहा कि प्रशासन को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता थी। चुनाव आयोग को जरूरी सुरक्षा बल तैनात करने चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि न्यायिक अधिकारियों का काम सुचारू रूप से हो सके।


गौरतलब है कि 1 अप्रैल को शाम 4 बजे से कालियाचक 2 ब्लॉक कार्यालय को बड़ी संख्या में लोगों ने घेर लिया था। उस समय वहां 7 न्यायाधीश मौजूद थे, जिनमें 4 महिला न्यायाधीश भी शामिल थीं। प्रदर्शनकारियों ने इन सभी न्यायाधीशों को देर रात तक कार्यालय में ही रोके रखा। पुलिस बल की भारी तैनाती के बावजूद प्रदर्शनकारियों को हटाया नहीं जा सका। बाद में रात में पुलिस ने सभी 7 न्यायाधीशों को सुरक्षित बाहर निकाला।


बताया गया कि करीब 8 घंटे तक न्यायाधीशों को घेरकर रखा गया। आधी रात के बाद पुलिस ने उन्हें बाहर निकाला, लेकिन उस दौरान भी उनके काफिले पर हमला करने की कोशिश की गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस काफिले की गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए। इस घटना के बाद चुनाव आयोग ने पहले ही डीजी से रिपोर्ट मांगी थी, और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.