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India Economy: अगस्त में Private Sector Growth में हल्का सुधार, लेकिन Manufacturing पर दबाव जारी |
India Economy: अगस्त में Private Sector Growth में हल्का सुधार, लेकिन Manufacturing पर दबाव जारी
नई दिल्ली: भारत की private sector activity में अगस्त के दौरान मामूली सुधार देखने को मिला है। S&P Global के flash PMI survey के अनुसार services sector में सुधार ने manufacturing की धीमी growth की भरपाई करने में मदद की। हालांकि overall private sector activity अभी भी चार साल से ज्यादा समय के निचले स्तर के आसपास बनी हुई है।
अगस्त के आंकड़े ऐसे समय आए हैं जब भारतीय economy को global uncertainty, ऊंची energy prices और कमजोर manufacturing demand जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
Services sector ने संभाला मोर्चा
अगस्त में services activity में सुधार देखने को मिला। इसी वजह से private sector की overall growth में मामूली recovery आई।
Services sector भारतीय economy का बड़ा हिस्सा है और इसमें activity बढ़ना overall economic momentum के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है। हालांकि recovery अभी बहुत मजबूत नहीं है।
Manufacturing growth पांच साल के निचले स्तर पर
दूसरी तरफ manufacturing sector की growth में कमजोरी बनी हुई है। Reuters के अनुसार अगस्त में manufacturing expansion करीब पांच साल के सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गई।
इससे पता चलता है कि goods-producing companies को demand और business conditions को लेकर अभी भी दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
Manufacturing sector में slowdown का असर production और नए orders पर पड़ सकता है। वहीं services में बेहतर activity ने overall PMI को ज्यादा कमजोर होने से रोका है।
Economy के लिए क्या संकेत?
PMI में 50 से ऊपर की reading आम तौर पर expansion और 50 से नीचे की reading contraction को दर्शाती है। इसलिए overall activity expansion में बनी हुई है, लेकिन growth की speed में कमजोरी चिंता का विषय है।
हाल के महीनों में भारतीय private sector की growth में लगातार moderation देखने को मिला था। जुलाई में services sector की growth भी चार साल से ज्यादा समय के निचले स्तर पर पहुंच गई थी।
अगस्त के आंकड़ों में मामूली recovery इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि private sector activity में गिरावट की गति कुछ कम हुई है।
हालांकि manufacturing की कमजोरी यह बताती है कि economy के सभी हिस्सों में recovery एक जैसी नहीं है। Services sector फिलहाल ज्यादा मजबूत दिखाई दे रहा है, जबकि factories और goods-producing companies को बेहतर demand का इंतजार है।
आने वाले महीनों में domestic demand, global trade, input costs और energy prices का असर private sector की growth पर महत्वपूर्ण रहेगा।
कुल मिलाकर अगस्त का PMI data भारतीय economy के लिए मिला-जुला संकेत देता है। Services ने growth को सहारा दिया है, लेकिन manufacturing में कमजोरी अभी भी बनी हुई है। इसलिए इसे मजबूत recovery के बजाय हल्की सुधार की शुरुआत के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा।
